11 reviews for Peeda Se Prerna Tak by Manoj Dwivedi
Rated 5 out of 5
Pravesh Kumar Bhadoriya –
मैंने सोचा था कुछ कहानियाँ पढ़ूँगा, लेकिन कब पूरी पुस्तक समाप्त हो गई, पता ही नहीं चला। हर कथा इतनी सजीव है कि मैं स्वयं को उसी संघर्ष का हिस्सा महसूस करता रहा पढ़ते समय । यह पुस्तक भावनाओं, आशा और हौसले की यात्रा है। जो इसे शुरू करेगा, अधूरा नहीं छोड़ेगा।आपका लेखन सराहनीय है
Rated 5 out of 5
PRASHENDRA RAJPOOT –
पीड़ा से प्रेरणा तक” पुस्तक पढ़कर यह सच में महसूस होता है कि पीड़ा भी जीवन को नई दिशा दे सकती है।
यह पुस्तक विद्यार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी है और साथ ही उन सभी के लिए प्रेरणा है जो किसी न किसी दर्द से गुजर रहे हैं।
लेखन में अनुभव, संवेदनशीलता और सकारात्मक सोच का सुंदर समावेश है।
हर पृष्ठ संघर्ष से आगे बढ़ने का साहस देता है।
यह कृति निराशा को आशा में बदलने की शक्ति रखती है।
इस उत्कृष्ट रचना और प्रेरणादायक लेखन के लिए हृदय से बहुत-बहुत धन्यवाद।
Rated 5 out of 5
Rajpoot Lodhu –
पीड़ा से प्रेरणा तक” पुस्तक पढ़कर यह सच में महसूस होता है कि पीड़ा भी जीवन को नई दिशा दे सकती है।
यह पुस्तक विद्यार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी है और साथ ही उन सभी के लिए प्रेरणा है जो किसी न किसी दर्द से गुजर रहे हैं।
लेखन में अनुभव, संवेदनशीलता और सकारात्मक सोच का सुंदर समावेश है।
हर पृष्ठ संघर्ष से आगे बढ़ने का साहस देता है।
यह कृति निराशा को आशा में बदलने की शक्ति रखती है।
इस उत्कृष्ट रचना और प्रेरणादायक लेखन के लिए हृदय से बहुत-बहुत धन्यवाद।
Rated 5 out of 5
Rajpoot Lodhu –
Nice
Rated 5 out of 5
Nainci –
मेरी सबसे भावुक कहानी ‘अंजली’ रही, जिसमें एक माँ की ममता क्या कुछ नहीं कर सकती—इसका अत्यंत मार्मिक चित्रण किया गया है। माँ के त्याग, धैर्य और अदम्य साहस की जो सजीव प्रस्तुति इस पुस्तक में देखने को मिलती है, वह सचमुच रोंगटे खड़े कर देने वाली है। यह कहानी पाठक के हृदय को भीतर तक झकझोर देती है और माँ के रूप को एक नई दृष्टि से समझने का अवसर देती है। आप इसी प्रकार अपने लेखन के माध्यम से हमारे लिए ऐसी सच्ची और भावनात्मक कहानियाँ लिखते रहें—यही हार्दिक शुभकामना है।”
Rated 5 out of 5
Vinod rathore –
प्रेरणादायक लेखन के लिए हृदय से बहुत-बहुत धन्यवाद।
Rated 5 out of 5
Reetesh Pal –
इस पुस्तक को पढ़ना केवल कहानियाँ पढ़ना नहीं, बल्कि हर घटना को जीना है। कई बार लगा जैसे पन्ने नहीं, जीवन पलट रहे हों। हर कहानी आपको भीतर खींच लेती है और छोड़ने का मन ही नहीं करता। यह पुस्तक पढ़कर समझ आता है कि शब्द भी इलाज बन सकते हैं। एक अनोखा और अविस्मरणीय अनुभव..
शानदार लेखन सर 🙏
Rated 5 out of 5
Gajendra Rajpoot –
Bahut hi achhi kitab hai sir 🙏🙏🙏
Rated 5 out of 5
Sunil Shukla –
very good book. Lot of inspiring truths. Keep up the good work Sir. 👍
Rated 5 out of 5
satyam shukla –
बहुत ही अच्छी बुक लिखी है सर अपने। इसमें बताई गई सभी किस्से प्रेरणादायक है। इनमें से एक किस्से का में खुद साक्षी रहा हूं। आप मरीज को जितने अपने पन और लगाव से ट्रीट करते है वो आज के युग में आमतौर में देखने को कहीं नहीं मिलता हे। आपका काम सच में सराहनीय हे। 🙏🙏
Rated 5 out of 5
Dr. Anjana Banoliya –
“पीङा से प्रेरणा तक ” ,पुस्तक पढ़कर किसी भी व्यक्ति में विश्वास और दृढ़ता की भावना जागृत होती है
क्योंकि मैं भी एक फिजियो हूं ,तो पुस्तक में ‘ दिव्य भेंट ‘ को पढ़ने के बाद बहुत ही सकारात्मकता महसूस होती है जिस तरह अंजली , जो कि एक माॅ है अपने बेटे के लिए परिवार और सामाजिक उलहायनो के बाद भी फिजियोथेरेपी के लिए निरन्तर सेंटर पर जाती है ,बहुत सराहनीय है ।
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Pravesh Kumar Bhadoriya –
मैंने सोचा था कुछ कहानियाँ पढ़ूँगा, लेकिन कब पूरी पुस्तक समाप्त हो गई, पता ही नहीं चला। हर कथा इतनी सजीव है कि मैं स्वयं को उसी संघर्ष का हिस्सा महसूस करता रहा पढ़ते समय । यह पुस्तक भावनाओं, आशा और हौसले की यात्रा है। जो इसे शुरू करेगा, अधूरा नहीं छोड़ेगा।आपका लेखन सराहनीय है
PRASHENDRA RAJPOOT –
पीड़ा से प्रेरणा तक” पुस्तक पढ़कर यह सच में महसूस होता है कि पीड़ा भी जीवन को नई दिशा दे सकती है।
यह पुस्तक विद्यार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी है और साथ ही उन सभी के लिए प्रेरणा है जो किसी न किसी दर्द से गुजर रहे हैं।
लेखन में अनुभव, संवेदनशीलता और सकारात्मक सोच का सुंदर समावेश है।
हर पृष्ठ संघर्ष से आगे बढ़ने का साहस देता है।
यह कृति निराशा को आशा में बदलने की शक्ति रखती है।
इस उत्कृष्ट रचना और प्रेरणादायक लेखन के लिए हृदय से बहुत-बहुत धन्यवाद।
Rajpoot Lodhu –
पीड़ा से प्रेरणा तक” पुस्तक पढ़कर यह सच में महसूस होता है कि पीड़ा भी जीवन को नई दिशा दे सकती है।
यह पुस्तक विद्यार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी है और साथ ही उन सभी के लिए प्रेरणा है जो किसी न किसी दर्द से गुजर रहे हैं।
लेखन में अनुभव, संवेदनशीलता और सकारात्मक सोच का सुंदर समावेश है।
हर पृष्ठ संघर्ष से आगे बढ़ने का साहस देता है।
यह कृति निराशा को आशा में बदलने की शक्ति रखती है।
इस उत्कृष्ट रचना और प्रेरणादायक लेखन के लिए हृदय से बहुत-बहुत धन्यवाद।
Rajpoot Lodhu –
Nice
Nainci –
मेरी सबसे भावुक कहानी ‘अंजली’ रही, जिसमें एक माँ की ममता क्या कुछ नहीं कर सकती—इसका अत्यंत मार्मिक चित्रण किया गया है। माँ के त्याग, धैर्य और अदम्य साहस की जो सजीव प्रस्तुति इस पुस्तक में देखने को मिलती है, वह सचमुच रोंगटे खड़े कर देने वाली है। यह कहानी पाठक के हृदय को भीतर तक झकझोर देती है और माँ के रूप को एक नई दृष्टि से समझने का अवसर देती है। आप इसी प्रकार अपने लेखन के माध्यम से हमारे लिए ऐसी सच्ची और भावनात्मक कहानियाँ लिखते रहें—यही हार्दिक शुभकामना है।”
Vinod rathore –
प्रेरणादायक लेखन के लिए हृदय से बहुत-बहुत धन्यवाद।
Reetesh Pal –
इस पुस्तक को पढ़ना केवल कहानियाँ पढ़ना नहीं, बल्कि हर घटना को जीना है। कई बार लगा जैसे पन्ने नहीं, जीवन पलट रहे हों। हर कहानी आपको भीतर खींच लेती है और छोड़ने का मन ही नहीं करता। यह पुस्तक पढ़कर समझ आता है कि शब्द भी इलाज बन सकते हैं। एक अनोखा और अविस्मरणीय अनुभव..
शानदार लेखन सर 🙏
Gajendra Rajpoot –
Bahut hi achhi kitab hai sir 🙏🙏🙏
Sunil Shukla –
very good book. Lot of inspiring truths. Keep up the good work Sir. 👍
satyam shukla –
बहुत ही अच्छी बुक लिखी है सर अपने। इसमें बताई गई सभी किस्से प्रेरणादायक है। इनमें से एक किस्से का में खुद साक्षी रहा हूं। आप मरीज को जितने अपने पन और लगाव से ट्रीट करते है वो आज के युग में आमतौर में देखने को कहीं नहीं मिलता हे। आपका काम सच में सराहनीय हे। 🙏🙏
Dr. Anjana Banoliya –
“पीङा से प्रेरणा तक ” ,पुस्तक पढ़कर किसी भी व्यक्ति में विश्वास और दृढ़ता की भावना जागृत होती है
क्योंकि मैं भी एक फिजियो हूं ,तो पुस्तक में ‘ दिव्य भेंट ‘ को पढ़ने के बाद बहुत ही सकारात्मकता महसूस होती है जिस तरह अंजली , जो कि एक माॅ है अपने बेटे के लिए परिवार और सामाजिक उलहायनो के बाद भी फिजियोथेरेपी के लिए निरन्तर सेंटर पर जाती है ,बहुत सराहनीय है ।